X-Ray ट्यूब डिज़ाइन: विस्तृत नोट्स

X-ray ट्यूब एक उच्च-वैक्यूम (high-vacuum) वाली ग्लास या मेटल की डिवाइस होती है, जो विद्युत ऊर्जा (electrical energy) को X-ray विकिरण (radiation) में बदलती है। मेडिकल डायग्नोस्टिक्स (रेडियोग्राफी, CT स्कैन आदि) में इसका उपयोग होता है।

1. कार्य सिद्धांत (Operating Principle)

X-ray ट्यूब मुख्य रूप से 4 चरणों में काम करती है:

  1. थर्मियानिक एमिशन (Thermionic Emission): फिलामेंट को गर्म करने पर उससे इलेक्ट्रॉनों का झुंड बाहर निकलता है।
  2. इलेक्ट्रॉन त्वरण (Acceleration): कैथोड और एनोड के बीच उच्च वोल्टेज (40 से 150 kVp) लागू करके इलेक्ट्रॉनों को अत्यधिक गति प्रदान की जाती है।
  3. फोकसिंग (Focusing): इलेक्ट्रॉनों की बीम को एनोड के एक छोटे बिंदु (Focal Spot) पर केंद्रित किया जाता है।
  4. ऊर्जा परिवर्तन (Energy Conversion): जब इलेक्ट्रॉन एनोड के टारगेट से टकराते हैं, तो उनकी गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) बदल जाती है:
    • 99% ऊष्मा (Heat Energy) में
    • 1% से कम X-Ray Radiation में

2. मुख्य घटक एवं संरचना (Core Components)

A. कैथोड असेंबली (Cathode Assembly – Negative Electrode)

कैथोड का मुख्य काम इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन करना और उन्हें एनोड की तरफ निर्देशित करना है।

  • फिलामेंट (Filament): यह थोरिएटेड टंगस्टन (Thoriated Tungsten) के बने दो पतले कॉइल होते हैं।
    • टंगस्टन का गलनांक (Melting Point) बहुत अधिक (3422C) होता है।
    • इसमें थोड़ा थोरियम (Thorium) मिलाने से कम तापमान पर भी अधिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
    • Dual Focus System: इसमें दो फिलामेंट होते हैं — छोटा फिलामेंट (बारीक विवरण/हाथ-पैर के एक्स-रे के लिए) और बड़ा फिलामेंट (अधिक पावर/छाती और पेट के एक्स-रे के लिए)।
  • फोकसिंग कप (Focusing Cup): यह एक ऋणात्मक (Negatively Charged) धातु का कप होता है जो फिलामेंट को घेरे रहता है। यह इलेक्ट्रॉनों को फैलने से रोककर एक पतली बीम में एनोड की तरफ भेजता है।

B. एनोड असेंबली (Anode Assembly – Positive Electrode)

एनोड का मुख्य कार्य इलेक्ट्रॉनों को रोकना और उत्पन्न हुई अत्यधिक गर्मी को बाहर निकालना है।

एनोड के प्रकार: Stationary vs. Rotating Anode

विशेषतास्थिर एनोड (Stationary Anode)घूर्णन एनोड (Rotating Anode)
उपयोगडेंटल यूनिट्स, कम पावर वाली पोर्टेबल मशीनेंहाई-पावर रेडियोग्राफी, CT स्कैन
टारगेट मटेरियलकॉपर ब्लॉक में लगा टंगस्टन का छोटा बटनटंगस्टन-रेनियम डिस्क (मोलिब्डेनम/ग्रेफाइट बेस के साथ)
गर्मी का फैलावगर्मी एक ही स्थिर जगह पर जमा होती हैएनोड के लगातार घूमने से गर्मी गोल ट्रैक पर फैलती है
घूर्णन गति (Speed)0 RPM (यह नहीं घूमता)3,000 से 10,000 RPM
क्षमता (Power)कमबहुत अधिक

टारगेट में इस्तेमाल होने वाले पदार्थ (Materials):

  1. टंगस्टन (Z=74): उच्च परमाणु संख्या होने के कारण यह कुशलता से X-ray बनाता है।
  2. रेनियम (5–10%): टंगस्टन में रेनियम मिलाने से बार-बार गर्म और ठंडा होने पर एनोड की सतह पर दरारें नहीं पड़तीं।
  3. मोलिब्डेनम/ग्रेफाइट बैक-डिस्क: यह एनोड डिस्क का वजन हल्का रखता है और अधिक ऊष्मा को सोखने की क्षमता देता है।

C. रोटर और स्टेटर (Rotor & Stator)

  • एनोड डिस्क को घुमाने के लिए इंडक्शन मोटर (Induction Motor) का उपयोग होता है।
  • स्टेटर कॉइल ट्यूब के बाहर होती है और रोटर ट्यूब के अंदर (वैक्यूम में) होता है।
  • रोटर विशेष बियरिंग्स (जैसे गैलियम मिश्र धातु या सिल्वर लुब्रिकेटेड) की मदद से बिना रुकावट के तेज गति से घूमता है।

D. एनवेलप / वैक्यूम ट्यूब (Glass or Metal Envelope)

  • पूरी कैथोड और एनोड असेंबली को एक पायरेक्स ग्लास (Pyrex Glass) या मेटल-सिरेमिक एनवेलप के अंदर रखा जाता है, जिसमें उच्च वैक्यूम (10−6 to 10−8 Torr) बनाया जाता है।
  • वैक्यूम का महत्व: यदि ट्यूब में हवा होगी, तो इलेक्ट्रॉन हवा के कणों से टकराकर अपनी ऊर्जा खो देंगे और फिलामेंट भी जल जाएगा।

E. प्रोटेक्टिव हाउसिंग और कूलिंग (Housing & Cooling)

  1. लेड-लाइन्ड मेटल केस (Lead-Lined Housing): बाहर का मुख्य ढांचा सीसे (Lead) से ढका होता है ताकि बेवजह निकलने वाला विकिरण (leakage radiation) बाहर न फैले।
  2. डायइलेक्ट्रिक ऑयल (Dielectric Oil): ट्यूब और बाहरी कवर के बीच विशेष तेल भरा होता है जो हाई-वोल्टेज इंसुलेशन प्रदान करता है और गर्मी को सोखता है।

3. मुख्य भौतिक सिद्धांत (Geometric Principles)

1. लाइन-फोकस सिद्धांत (Line-Focus Principle)

एनोड के टारगेट को एक विशेष कोण (7 से 17) पर काटा जाता है। इससे:

  • Actual Focal Spot (वास्तविक टकराने की जगह): बड़ी रहती है, जिससे गर्मी आसानी से फैल जाती है।
  • Effective Focal Spot (प्रभावी X-ray बीम का आकार): छोटा दिखाई देता है, जिससे इमेज की क्लैरिटी और शार्पनेस बहुत बेहतर मिलती है।

Effective Focal Spot Size=Actual Focal Spot Size×sin(θ)

2. एनोड हील प्रभाव (Anode Heel Effect)

एनोड के तिरछे कोण के कारण, एनोड की तरफ से निकलने वाली X-ray किरणों को एनोड धातु के अंदर से थोड़ा अधिक सफर तय करना पड़ता है।

  • परिणाम: कैथोड की तरफ X-ray की तीव्रता (intensity) अधिक होती है और एनोड की तरफ कम।
  • क्लीनिकल उपयोग: शरीर के मोटे हिस्से (जैसे पेट या जांघ) को हमेशा कैथोड (Cathode) साइड की तरफ रखा जाता है।

By abhi

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