एक्स-रे ट्यूब में कैथोड असेंबली (ऋणात्मक इलेक्ट्रोड)

कैथोड असेंबली नैदानिक (Diagnostic) एक्स-रे ट्यूब का ऋणात्मक टर्मिनल (Negative Terminal) होता है। इसका मुख्य कार्य थर्मियोनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनों की एक स्थिर और नियंत्रित आपूर्ति उत्पन्न करना है, और इलेक्ट्रोस्टैटिक बल का उपयोग करके उन इलेक्ट्रॉनों को एक बीम (किरण पुंज) के रूप में धनात्मक रूप से चार्ज किए गए एनोड टारगेट (Anode Target) की ओर केंद्रित करना है।

एक्स-रे उत्पादन की दक्षता बहुत कम होती है— 99% से अधिक गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) ऊष्मा (Heat) में बदल जाती है। इसलिए, कैथोड असेंबली का निर्माण, सामग्री (Materials) और इसके विद्युत सर्किट (Electrical Circuits) इमेज की स्पष्टता (Spatial Resolution) और एक्स-रे ट्यूब के जीवनकाल को सीधे प्रभावित करते हैं।

कैथोड असेंबली के मुख्य भाग

संरचनात्मक रूप से कैथोड असेंबली मुख्य रूप से तीन भागों से मिलकर बनती है: फिलामेंट कॉइल (Filament Coils), फोकसिंग कप (Focusing Cup), और सहायक वायरिंग/ढांचा (Support Infrastructure)

1. फिलामेंट कॉइल (Filament Coil)

फिलामेंट एक पतले तार की छोटी कुंडली (Coil) होती है, जिसका व्यास लगभग 1 mm से 2 mm और लंबाई 7 mm से 15 mm होती है।

  • सामग्री: यह थोरिएटेड टंगस्टन (Thoriated Tungsten) से बना होता है (टंगस्टन में 1%−2% थोरियम ऑक्साइड मिलाया जाता है)।
    • टंगस्टन (W): इसका गलनांक (Melting Point) बहुत अधिक (3,422C) होता है और वाष्प दबाव (Vapor Pressure) कम होता है, जिससे यह उच्च तापमान पर पिघले या वाष्पित हुए बिना काम कर सकता है।
    • थोरियम का उपयोग: थोरियम मिलाने से टंगस्टन का वर्क फंक्शन (Work Function) 4.52 eV से घटकर 2.6 eV हो जाता है, जिससे कम तापमान पर भी अधिक इलेक्ट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।

2. फोकसिंग कप (Focusing Cup)

फोकसिंग कप एक धातु का ब्लॉक होता है जिसमें खांचे (Recesses) बने होते हैं, जहाँ फिलामेंट कॉइल स्थित होते हैं।

  • सामग्री: यह निकल (Nickel), मोलिब्डेनम (Molybdenum), या स्टेनलेस स्टील जैसी उच्च गलनांक वाली धातुओं से बनाया जाता है।
  • इलेक्ट्रोस्टैटिक सिद्धांत: चूँकि इलेक्ट्रॉनों पर ऋणात्मक आवेश (Negative Charge) होता है, इसलिए वे आपस में एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (Repel) करते हैं। फोकसिंग कप को फिलामेंट की तुलना में ऋणात्मक विभव (Negative Potential) पर रखा जाता है, जिससे यह इलेक्ट्रॉनों को बाहर फैलने से रोकता है और उन्हें एक संकीर्ण बीम में दबाकर एनोड की ओर भेजता है।

विद्युत वायरिंग और सर्किट (Electrical Wiring & Circuitry)

कैथोड असेंबली को संचालित करने के लिए दो अलग-अलग विद्युत सर्किट की आवश्यकता होती है: फिलामेंट सर्किट और हाई-वोल्टेज ट्यूब सर्किट

                          मुख्य एसी पावर (AC Power)
                                  │
         ┌────────────────────────┴────────────────────────┐
         ▼                                                 ▼
┌───────────────────┐                             ┌───────────────────┐
│ हाई-वोल्टेज स्टेप-अप│                             │  स्टेप-डाउन फिलामेंट│
│   ट्रांसफॉर्मर    │                             │    ट्रांसफॉर्मर    │
└────────┬──────────┘                             └────────┬──────────┘
         │ (kVp सर्किट: 20–150 kV)                         │ (3–6 A, 6–12 V)
         ▼                                                 ▼
┌─────────────────────────────────────────────────────────────────────┐
│                           कैथोड असेंबली                             │
│                                                                     │
│   कॉमन रिटर्न वायर (Common Return Wire) ───────────────┐            │
│                                                        │            │
│   स्मॉल फिलामेंट लाइन ──[ सेलेक्टर स्विच ]──┐         │            │
│                                             ▼          ▼            │
│   लार्ज फिलामेंट लाइन ───────────────────> [ फिलामेंट कॉइल ]       │
│                                                        │            │
│   फोकसिंग कप बायस लाइन ────────────────────────────────┘            │
└─────────────────────────────────────────────────────────────────────┘

1. फिलामेंट सर्किट (निम्न वोल्टेज, उच्च एम्पीयर)

यह सर्किट फिलामेंट को गर्म करके थर्मियोनिक उत्सर्जन तापमान (>2,200C) तक पहुँचाने के लिए ऊर्जा प्रदान करता है।

  • स्टेप-डाउन ट्रांसफॉर्मर: यह सामान्य सप्लाई वोल्टेज (220 V−480 V) को घटाकर 6 V−12 V कर देता है, लेकिन करंट को बढ़ाकर 3 A−6 A कर देता है।
  • mA नियंत्रण: फिलामेंट करंट (If) में थोड़ा सा बदलाव करने पर भी ट्यूब से निकलने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या (Tube Current, mA) में बड़ा अंतर आता है।
  • स्टैंडबाई करंट: फिलामेंट को अचानक तापीय झटके (Thermal Shock) से बचाने के लिए जब मशीन इस्तेमाल में नहीं होती, तब भी एक कम मात्रा में करंट फिलामेंट को हल्का गर्म रखता है।

2. हाई-वोल्टेज ट्यूब सर्किट (kVp Circuit)

यह सर्किट कैथोड और एनोड के बीच एक विशाल संभावित अंतर (Potential Difference) बनाता है।

  • स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर और रेक्टिफायर: यह वोल्टेज को 20 kVp से 150 kVp तक बढ़ा देता है। रेक्टिफायर इसे दिष्ट धारा (DC) में बदलते हैं ताकि कैथोड हमेशा ऋणात्मक (Negative) रहे।
  • इलेक्ट्रॉन त्वरण (Acceleration): जब kVp लागू किया जाता है, तो कैथोड पर जमा इलेक्ट्रॉन का बादल प्रकाश की गति से लगभग आधे वेग (0.5c) से एनोड टारगेट की ओर तेजी से भागता है।

3. कैथोड वायरिंग आर्किटेक्चर

ड्युअल-फिलामेंट कैथोड असेंबली में आमतौर पर तीन या चार तारों का कनेक्शन होता है:

  • कॉमन रिटर्न लीड (Common Return Lead): दोनों फिलामेंट के लिए सर्किट पूरा करता है।
  • स्मॉल फिलामेंट पावर लीड: छोटे फिलामेंट को चालू करने के लिए स्विच से जुड़ा होता है।
  • लार्ज फिलामेंट पावर लीड: बड़े फिलामेंट को चालू करने के लिए switch से जुड़ा होता है।
  • फोकसिंग कप कनेक्शन: सीधे फिलामेंट सर्किट या एक अलग बायस वोल्टेज सर्किट से जुड़ा होता है।

ड्युअल-फोकस सिस्टम (Dual-Focus Systems)

आधुनिक एक्स-रे ट्यूबों में ड्युअल-फोकस कैथोड असेंबली का उपयोग किया जाता है, जिसमें फोकसिंग कप के अंदर दो फिलामेंट (एक छोटा और एक बड़ा) पास-पास लगे होते हैं।

मापदंड (Parameter)छोटा फिलामेंट (Small Focal Spot)बड़ा फिलामेंट (Large Focal Spot)
आकार (Size)0.1 mm−0.6 mm1.0 mm−1.2 mm
इमेज स्पष्टता (Resolution)उच्च स्पष्टता (बारिश/सुक्ष्म विवरणों के लिए)मध्यम स्पष्टता
ऊष्मा सहन क्षमताकम (mA क्षमता सीमित)अधिक (उच्च mA सहन कर सकता है)
नैदानिक उपयोग (Clinical Uses)हाथ-पैर की हड्डियां, बच्चों की इमेजिंग, मैमोग्राफीचेस्ट (छाती), पेट (Abdomen) की इमेजिंग

कैथोड संचालन के भौतिक सिद्धांत

1. थर्मियोनिक उत्सर्जन (Thermionic Emission)

जब फिलामेंट से होकर बिजली गुजरती है, तो प्रतिरोध (Resistance) के कारण गर्मी पैदा होती है। 2,200C से अधिक तापमान होने पर, टंगस्टन के बाहरी इलेक्ट्रॉन इतनी तापीय ऊर्जा प्राप्त कर लेते हैं कि वे धातु की सतह को छोड़कर बाहर निकल जाते हैं।

2. स्पेस चार्ज प्रभाव (Space Charge Effect)

कम वोल्टेज (<40 kVp) पर, फिलामेंट से बाहर निकले इलेक्ट्रॉन फिलामेंट के ठीक सामने एक बादल (Cloud) बना लेते हैं। इस ऋणात्मक बादल को स्पेस चार्ज कहते हैं। यह नया उत्सर्जित होने वाले इलेक्ट्रॉनों पर प्रतिकर्षण बल लगाता है और उन्हें बाहर निकलने से रोकता है।

फिलामेंट का गर्म होना ──> इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन ──> ऋणात्मक बादल (Space Charge) ──> नए इलेक्ट्रॉनों को रोकता है

3. सेचुरेशन वोल्टेज (Saturation Voltage)

जब एनोड का वोल्टेज (kVp) बढ़ाया जाता है, तो एनोड का धनात्मक आकर्षण इलेक्ट्रॉनों को तेज़ी से अपनी ओर खींचता है। एक निश्चित वोल्टेज (लगभग >40 kVp) के बाद, सभी उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन तुरंत एनोड पर पहुँचने लगते हैं। इसे सेचुरेशन पॉइंट कहते हैं। इसके बाद kVp बढ़ाने से ट्यूब करंट (mA) नहीं बढ़ता, उसे केवल फिलामेंट करंट बढ़ाकर ही बढ़ाया जा सकता है।

ग्रिड-कंट्रोल कैथोड (Grid-Controlled Cathodes)

हाई-स्पीड इमेजिंग (जैसे एंजियोग्राफी या पल्स्ड फ्लोरोस्कोपी) में, जहाँ प्रति सेकंड सैकड़ों बार एक्स-रे चालू और बंद करनी होती है, सामान्य हाई-वोल्टेज जनरेटर इतनी तेजी से काम नहीं कर सकते।

इसके लिए ग्रिड-कंट्रोल्ड कैथोड का उपयोग किया जाता है:

  • एक्सपोजर चालू: फोकसिंग कप और फिलामेंट एक ही वोल्टेज पर होते हैं।
  • एक्सपोजर बंद: फोकसिंग कप पर एक बहुत मजबूत ऋणात्मक वोल्टेज (लगभग −2,000 V) लगाया जाता है। यह नकारात्मक क्षेत्र इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह को तुरंत रोक देता है, जिससे बिना हाई-वोल्टेज बंद किए एक्स-रे का उत्सर्जन तुरंत रुक जाता है।

फिलामेंट का क्षरण और ट्यूब का खराब होना

अत्यधिक गर्मी और थर्मल साइकिल के कारण समय के साथ कैथोड असेंबली खराब होने लगती है:

  1. टंगस्टन का वाष्पीकरण (Tungsten Vaporization):
    • फिलामेंट का पतला होना: बार-बार गर्म होने से टंगस्टन के परमाणु वाष्पित हो जाते हैं, जिससे तार पतला हो जाता है। पतला तार अधिक गर्म होता है, जिससे इसका जीवनकाल घटता है।
    • ट्यूब में आर्किंग (Arcing): वाष्पित टंगस्टन काँच की ट्यूब की आंतरिक दीवारों पर जम जाता है, जिससे स्पार्किंग (Arcing) हो सकती है और ट्यूब फट सकती है।
  2. फिलामेंट का टूटना (Burnout): तार के बहुत अधिक पतले हो जाने के कारण यह बीच से टूट जाता है, जिससे ट्यूब पूरी तरह काम करना बंद कर देती है।
  3. शारीरिक विकृति (Deformation): बार-बार गर्म और ठंडा होने से फिलामेंट कॉइल का आकार बिगड़ जाता है, जिससे एक्स-रे बीम का फोकस खराब हो जाता है।

By abhi

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