एनोड असेंबली नैदानिक (Diagnostic) एक्स-रे ट्यूब का धनात्मक इलेक्ट्रोड (Positive Terminal) होता है। जहाँ कैथोड असेंबली आने वाले इलेक्ट्रॉनों की बीम को उत्पन्न और आकार देती है, वहीं एनोड असेंबली एक लक्ष्य (Target) के रूप में कार्य करती है: यह अत्यधिक उच्च गति वाले इलेक्ट्रॉनों को प्राप्त करती है, टकराव के दौरान उत्पन्न अत्यधिक तापीय ऊर्जा (Thermal Energy) को अवशोषित और छितराती (Dissipate) है, और इलेक्ट्रॉनों की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) को ब्रेम्सस्ट्रालुंग (Bremsstrahlung) और कैरेक्टरिस्टिक विकिरण (Characteristic Radiation) के माध्यम से नैदानिक एक्स-रे फोटॉनों में परिवर्तित करती है।
चूँकि टकराने वाले इलेक्ट्रॉन बीम की 99% से अधिक गतिज ऊर्जा ऊष्मा (Heat) में बदल जाती है—और केवल 1% से भी कम प्रयोग करने योग्य एक्स-रे में बदलती है—इसलिए एनोड का निर्माण, परतों का चयन, ज्यामितीय कोण (Geometric Angle), और ऊष्मा-विसर्जन गुण (Heat-Dissipation Properties) ही एक्स-रे सिस्टम की पावर क्षमता, इमेज की स्पष्टता (Spatial Resolution) और जीवनकाल को तय करने वाले प्राथमिक कारक हैं।
संरचनात्मक प्रकार: स्थिर (Stationary) बनाम घूर्णी (Rotating) एनोड

इमेजिंग उपकरण की पावर आवश्यकताओं के आधार पर, एनोड असेंबली मुख्य रूप से दो डिज़ाइनों में बनाई जाती है:
एनोड के प्रकार (Anode Configurations)
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│ स्थिर एनोड (Stationary)│ │घूर्णी एनोड (Rotating) │
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│ फिक्स्ड टारगेट स्पॉट │ निरंतर घूमता हुआ फोकल ट्रैक
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[ कम ऊष्मा क्षमता ] [ उच्च ऊष्मा क्षमता ]
डेंटल और पोर्टेबल मशीनें सामान्य रेडियोग्राफी और सीटी स्कैन
1. स्थिर एनोड (Stationary Anodes)
- संरचना: इसमें टंगस्टन का एक छोटा ब्लॉक सीधे तांबे (Copper) के एक बड़े ब्लॉक में बैठाया गया होता है।
- ऊष्मा का रास्ता: छोटे टकराव वाले स्थान पर उत्पन्न ऊष्मा तांबे के ब्लॉक के माध्यम से बाहरी तेल के स्नान (Oil Bath) में प्रवाहित होती है।
- सीमाएं: चूँकि इलेक्ट्रॉन लगातार एक ही जगह पर टकराते हैं, इसलिए ऊष्मा तेज़ी से बढ़ती है। परिणामस्वरूप, स्थिर एनोड केवल डेंटल (दांतों की) एक्स-रे मशीनों और पोर्टेबल एक्स-रे उपकरणों तक ही सीमित हैं।
2. घूर्णी एनोड (Rotating Anodes)
- संरचना: इसमें एक ढलानदार, डिस्क के आकार का टारगेट होता है जो एक केंद्रीय शाफ्ट असेंबली पर लगा होता है।
- ऊष्मा का रास्ता: एक स्थिर स्थान पर टकराने के बजाय, इलेक्ट्रॉन बीम लगातार घूमती हुई रिंग पर टकराती है जिसे फोकल ट्रैक (Focal Track) कहा जाता है। बड़े सतह क्षेत्र पर गर्मी फैलाने से स्थिर डिज़ाइनों की तुलना में ऊष्मा भंडारण क्षमता 1,000 गुना तक बढ़ जाती है।
- उपयोग: यह सामान्य रेडियोग्राफी, फ्लोरोस्कोपी, कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT स्कैन), और एंजियोग्राफी सिस्टम में सार्वभौमिक रूप से उपयोग किया जाता है।
एनोड बॉडी के मुख्य भाग (Core Components)
एक आधुनिक घूर्णी एनोड बॉडी एक बहु-स्तरीय (Multi-layered) मिश्रित डिस्क होती है जिसे अत्यधिक तापमान, उच्च यांत्रिक तनाव और तीव्र विकिरण को संभालने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
1. टारगेट सतह / फोकल ट्रैक (Target Surface / Focal Track)
बाहरी पट्टी जहाँ इलेक्ट्रॉन टकराते हैं, वह टंगस्टन-रेनियम मिश्र धातु (Tungsten-Rhenium Alloy) (90–95% टंगस्टन, 5–10% रेनियम) से बनी होती है।
- टंगस्टन (Z=74): इसका चयन इसकी उच्च परमाणु संख्या के कारण किया जाता है, जो एक्स-रे उत्पादन दक्षता को बढ़ाता है, और इसका गलनांक (3,422∘C) अत्यधिक उच्च होता है, जो पिघले बिना तीव्र इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह को सहन कर सकता है।
- रेनियम का उपयोग: शुद्ध टंगस्टन बार-बार गर्म और ठंडा होने से भुरभुरा (Brittle) हो जाता है और उसमें दरारें पड़ जाती हैं। रेनियम मिलाने से मिश्र धातु की लचीलापन सीमा बढ़ती है, जिससे सतह पर तापीय दरारें और गड्ढे (Pitting) नहीं पड़ते।
2. उप-संरचना परतें (Molybdenum & Graphite Substructure)
टंगस्टन-रेनियम सतह के नीचे ऊष्मा प्रबंधन के लिए बनाई गई परतें होती हैं:
- मोलिब्डेनम कोर (Molybdenum Core): मोलिब्डेनम का गलनांक उच्च (2,623∘C) और घनत्व टंगस्टन से कम होता है, जो डिस्क को हल्का रखते हुए संरचनात्मक मजबूती प्रदान करता है।
- ग्रेफाइट बैकिंग लेयर (Graphite Layer): उच्च क्षमता वाले एनोड में डिस्क के निचले हिस्से में ग्रेफाइट की एक मोटी परत जुड़ी होती है। ग्रेफाइट की विशिष्ट ऊष्मा क्षमता बहुत अधिक होती है, जो वजन बढ़ाए बिना टंगस्टन परत से ऊष्मा को अवशोषित करने वाले थर्मल सिंक के रूप में कार्य करती है।
3. मोलिब्डेनम स्टेम / शाफ्ट (Molybdenum Stem)
टारगेट डिस्क एक लंबे, पतले मोलिब्डेनम स्टेम के माध्यम से केंद्रीय यांत्रिक असेंबली से जुड़ी होती है।
तांबे जैसी धातुओं की तुलना में मोलिब्डेनम ऊष्मा का अच्छा चालक नहीं होता है। इसलिए, यह पतला स्टेम एक थर्मल नेक (Thermal Choke) की तरह काम करता है। यह लाल-गर्म डिस्क (>1,000∘C) से आंतरिक बेयरिंग और पुर्जों में गर्मी के जाने की गति को सीमित करता है, जिससे अंदरूनी हिस्से खराब होने से बच जाते हैं।
विशेष एक्स-रे ट्यूब एनोड (Special X-Ray Tube Anodes: Modality-Specific Engineering)
सामान्य रेडियोग्राफी में, एक्स-रे ट्यूब एनोड आमतौर पर टंगस्टन-रेनियम फोकल ट्रैक पर निर्भर होते हैं, जो मोलिब्डेनम या ग्रेफाइट बेस पर लगे होते हैं। हालांकि, विशेष मेडिकल इमेजिंग अनुप्रयोगों—जैसे मैमोग्राफी (Mammography), डेंटल रेडियोग्राफी (Dental Radiography), फ्लोरोस्कोपी (Fluoroscopy), और कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT)—की भौतिक, ज्यामितीय और तापीय मांगें अलग होती हैं।
प्रत्येक इमेजिंग तकनीक के लिए इमेज कंट्रास्ट, स्थानिक स्पष्टता (Spatial Resolution) और ऊष्मा विसर्जन (Heat Dissipation) को अनुकूलित करने के लिए विशेष एनोड असेंबली डिज़ाइन की गई हैं।
1. मैमोग्राफी एक्स-रे ट्यूब एनोड (Mammography X-Ray Tube Anodes)
मैमोग्राफी के लिए मरीज को कम से कम विकिरण (Radiation Dose) देते हुए सॉफ्ट टिशू (वसा, ग्रंथियों के ऊतक और माइक्रोकैल्सीफिकेशन) की उच्च-कंट्रास्ट इमेजिंग की आवश्यकता होती है। सॉफ्ट टिशू कंट्रास्ट के लिए कम ऊर्जा वाले फोटॉन स्पेक्ट्रम (17 से 25 keV) की आवश्यकता होती है। मानक टंगस्टन एनोड उच्च ऊर्जा पर एक्स-रे उत्पन्न करते हैं जो बिना पर्याप्त कंट्रास्ट दिए सॉफ्ट टिशू से गुजर जाते हैं।
मैमोग्राफी एनोड
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│ मोलिब्डेनम (Mo)│ │ रोडियम (Rh) │
│ (Z = 42) │ │ (Z = 45) │
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│ K-कैरेक्टरिस्टिक: 17.5 & 19.6 keV │ K-कैरेक्टरिस्टिक: 20.2 & 22.7 keV
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[ वसायुक्त और मध्यम स्तन ] [ घने / मोटे स्तन ऊतक ]
मुख्य इंजीनियरिंग विशेषताएं:
- टारगेट सामग्री (Target Materials):
- मोलिब्डेनम (Mo,Z=42): यह 17.5 keV और 19.6 keV पर K-कैरेक्टरिस्टिक एक्स-रे उत्पन्न करता है। यह ऊर्जा सामान्य-घनत्व वाले स्तन ऊतकों के लिए बिल्कुल उपयुक्त है।
- रोडियम (Rh,Z=45): इसका उपयोग घने स्तन ऊतकों (Dense Breasts) के लिए किया जाता है। रोडियम 20.2 keV और 22.7 keV पर एक्स-रे उत्पन्न करता है, जो मोलिब्डेनम की तुलना में घने ऊतकों को बेहतर तरीके से भेदता है।
- ड्युअल-ट्रैक एनोड: कई आधुनिक प्रणालियों में दो फोकल ट्रैक वाले घूर्णी एनोड का उपयोग किया जाता है (एक मोलिब्डेनम, एक रोडियम), जो स्तन की मोटाई के आधार पर स्वचालित रूप से स्विच हो जाते हैं।
- माइक्रो-फोकल स्पॉट (0.1 mm से 0.3 mm): मैग्निफिकेशन मैमोग्राफी के लिए छोटे फोकल स्पॉट की आवश्यकता होती है ताकि बिना किसी धुंधलेपन (Blur) के छोटे माइक्रोकैल्सीफिकेशन (<0.1 mm) को भी स्पष्ट देखा जा सके।
- अधिक तीखा एनोड कोण (0∘ से 16∘): छोटे प्रभावी फोकल स्पॉट को बनाए रखते हुए चौड़े क्षेत्र को कवर करने के लिए एनोड कोण को अधिक तीखा (Steep) रखा जाता है।
2. डेंटल एक्स-रे ट्यूब एनोड (Dental X-Ray Tube Anodes)
डेंटल इमेजिंग को इंट्राओरल रेडियोग्राफी (दांत के अंदर की इमेज) और एक्स्ट्राओरल इमेजिंग (पेनोरेमिक / CBCT) में विभाजित किया गया है।
डेंटल एनोड
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│ स्थिर एनोड │ │ घूर्णी एनोड │
│ (इंट्राओरल) │ │ (पेनोरेमिक/CBCT) │
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│ कम ऊष्मा भार │ उच्च तापीय क्षमता
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[ छोटा और कम पावर वाला ] [ निरंतर स्कैनिंग ]
A. इंट्राओरल डेंटल एनोड (स्थिर एनोड)
- डिजाइन: ये अत्यधिक छोटे, स्थिर एनोड (Stationary Anodes) होते हैं, जिनमें तांबे (Copper) के एक बड़े ब्लॉक के भीतर एक छोटा टंगस्टन टारगेट लगा होता है।
- ऊष्मा प्रबंधन: चूंकि इंट्राओरल एक्सपोज़र बहुत कम समय (0.01 से 0.5 सेकंड) और कम करंट (4 से 10 mA) के लिए होते हैं, इसलिए ऊष्मा बहुत कम बनती है। तांबा एक पैसिव हीट सिंक के रूप में काम करता है और बिना किसी मोटर ड्राइव के गर्मी को बाहर निकाल देता है।
- फोकल स्पॉट: छोटे फोकल स्पॉट (0.4 mm से 0.7 mm) दांतों की बारीक संरचनाओं (एनामेल, डेंटिन) का स्पष्ट विवरण प्रदान करते हैं।
B. पेनोरेमिक और कोण-बीम सीटी (CBCT) एनोड
- डिजाइन: CBCT में निरंतर एक्सपोज़र (10 से 40 सेकंड) की आवश्यकता होती है क्योंकि मशीन मरीज के सिर के चारों ओर घूमती है। ये मशीनें छोटे व्यास वाले घूर्णी टंगस्टन एनोड (Rotating Tungsten Anodes) का उपयोग करती हैं ताकि छोटे फोकल स्पॉट (0.2 mm से 0.5 mm) को बनाए रखते हुए निरंतर गर्मी को सहन किया जा सके।
3. फ्लोरोस्कोपी और इंटरवेंशनल एनोड (Fluoroscopy Anodes)
फ्लोरोस्कोपी में वास्तविक समय (Real-time) की निरंतर इमेजिंग शामिल होती है (जैसे एंजियोग्राफी)। एनोड को दो ऑपरेटिंग मोड का समर्थन करना होता है: निरंतर कम-करंट आउटपुट (1 से 5 mA) और उच्च-करंट रेडियोग्राफिक एक्सपोज़र (100 से 1,000 mA)।
फ्लोरोस्कोपी एनोड संरचना
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│ भारी कंपोजिट डिस्क │
│ (टंगस्टन + मोलिब्डेनम + ग्रेफाइट)│
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│ ग्रिड-कंट्रोल्ड बायस सिस्टम │
│ (पल्स्ड मोड: तेज़ On/Off) │
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मुख्य इंजीनियरिंग विशेषताएं:
- उच्च ऊष्मा भंडारण क्षमता वाली डिस्क: इसमें ग्रेफाइट-समर्थित कंपोजिट डिस्क (120 mm से 150 mm व्यास) का उपयोग किया जाता है। ग्रेफाइट एक थर्मल बफर के रूप में कार्य करता है, जो लंबे समय तक चलने वाले फ्लोरोस्कोपी के दौरान बनने वाली निरंतर गर्मी को अवशोषित करता है।
- ग्रिड-कंट्रोल्ड टारगेट स्विचिंग: पल्स्ड फ्लोरोस्कोपी मरीज को दी जाने वाली विकिरण की मात्रा (Dose) को कम करने के लिए छोटी-छोटी पल्स में रेडिएशन देती है। एनोड पर तापीय झटका दिए बिना, फोकसिंग कप पर ग्रिड वोल्टेज का उपयोग करके इलेक्ट्रॉन बीम को तुरंत चालू और बंद किया जाता है।
- लिक्विड-कूल्ड हाउसिंग: एनोड डिस्क से निकलने वाली गर्मी को आसपास के तेल (Dielectric Oil) द्वारा अवशोषित किया जाता है, जिसे बाहरी हीट एक्सचेंजर के माध्यम से पंप करके ठंडा किया जाता है।
4. कंप्यूटेड टोमोग्राफी एनोड (CT Scan Anodes)
कंप्यूटेड टोमोग्राफी (CT) डायग्नोस्टिक इमेजिंग में सबसे अधिक ऊष्मा उत्पन्न करने वाला अनुप्रयोग है। सीटी ट्यूब उच्च वोल्टेज (80 से 140 kVp) और उच्च करंट (200 से 1,000 mA) पर काम करती हैं, जो निरंतर स्कैन के दौरान अत्यधिक तापीय भार (5 से 8 MHU) पैदा करती हैं।
CT एनोड में नए नवाचार
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│ लिक्विड मेटल │ │ डायरेक्ट ऑयल-कूल्ड│ │ फ्लाइंग फोकल स्पॉट│
│ बेयरिंग (GalInstan)│ │ एनोड │ │ (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक)│
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│ सीधी तापीय चालकता │ सीधा कूलिंग संपर्क │ इमेज रिज़ॉल्यूशन को
▼ ▼ ▼ दोगुना करता है
[ घर्षण को खत्म करता है ] [ उच्चतम ऊष्मा विसर्जन ] [ उच्च स्पष्टता ]
मुख्य इंजीनियरिंग विशेषताएं:
- लिक्विड मेटल बेयरिंग (GalInstan): पारंपरिक बॉल बेयरिंग सीटी के उच्च तापमान और घूमने की गति (10,000 RPM) पर जल्दी घिस जाते हैं। आधुनिक सीटी एनोड तरल धातु मिश्र धातु (Gallium-Indium-Tin) से चिकनाईयुक्त (Lubricated) बेयरिंग का उपयोग करते हैं।
- फायदा: यह एनोड शाफ्ट से सीधे बेयरिंग के माध्यम से गर्मी को बाहर निकालने के लिए एक सीधा धातु तापीय मार्ग प्रदान करता है।
- डायरेक्ट कूलेंट / घूर्णी एनवेलप ट्यूब (जैसे Straton Tube): उन्नत सीटी स्कैनर्स में, पूरी ट्यूब एनवेलप एनोड डिस्क के साथ घूमती है। एनोड के पिछले हिस्से का सीधा संपर्क प्रवाहित हो रहे तेल (Cooling Oil) से होता है, जिससे ऊष्मा का विसर्जन बहुत तेज़ी से होता है।
- फ्लाइंग फोकल स्पॉट (Flying Focal Spot): सीटी स्कैन में उच्च स्पष्टता की आवश्यकता होती है। इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कॉइल एनोड टारगेट पर इलेक्ट्रॉन बीम को तेज़ी से आगे-पीछे घुमाती हैं, जिससे एनोड को ज़्यादा गर्म किए बिना इमेज की गुणवत्ता और रिज़ॉल्यूशन दोगुना हो जाता है।
तुलना तालिका (Summary Comparison Matrix)
| इमेजिंग तकनीक | एनोड टारगेट सामग्री | संरचनात्मक प्रकार | मुख्य इंजीनियरिंग फोकस | हल की गई मुख्य चुनौती |
|---|---|---|---|---|
| मैमोग्राफी | मोलिब्डेनम (Mo), रोडियम (Rh) | छोटा घूर्णी / ड्युअल-ट्रैक | कम-ऊर्जा कैरेक्टरिस्टिक एक्स-रे (17−23 keV) | सॉफ्ट टिशू में उच्च कंट्रास्ट |
| इंट्राओरल डेंटल | टंगस्टन (W) तांबे के ब्लॉक में | स्थिर (Stationary) | छोटा आकार, पैसिव कूलिंग | सरल और कम पावर की दांतों की इमेजिंग |
| फ्लोरोस्कोपी | ग्रेफाइट पर टंगस्टन-रेनियम | बड़ा और भारी घूर्णी एनोड | उच्च निरंतर तापीय भंडारण | लंबे समय तक वास्तविक समय की इमेजिंग |
| सीटी स्कैन (CT) | मोलिब्डेनम/ग्रेफाइट पर टंगस्टन-रेनियम | लिक्विड मेटल / डायरेक्ट-कूल्ड घूर्णी | अत्यधिक ऊष्मा विसर्जन (>5 MHU), तेज़ घूर्णन | निरंतर उच्च-पावर स्कैनिंग |
भौतिक सिद्धांत और ज्यामिति (Physical Dynamics and Geometry)
1. लाइन-फोकस सिद्धांत (Line-Focus Principle)
रेडियोग्राफ में उच्च स्पष्टता (Detail) प्राप्त करने के लिए, विकिरण का स्रोत जितना संभव हो उतना छोटा होना चाहिए। हालांकि, एक छोटे स्थान पर उच्च इलेक्ट्रॉन शक्ति को केंद्रित करने से टारगेट तुरंत पिघल सकता है।
लाइन-फोकस सिद्धांत एनोड के टारगेट को एक कोण (θ, आमतौर पर 6∘ से 20∘) पर ढलानदार बनाकर इस समस्या को हल करता है:
- वास्तविक फोकल स्पॉट (Actual Focal Spot): टारगेट की सतह का वह भौतिक क्षेत्र जहाँ इलेक्ट्रॉन टकराते हैं।
- प्रभावी फोकल स्पॉट (Effective Focal Spot): मरीज और डिटेक्टर की ओर नीचे की तरफ प्रक्षेपित (Projected) एक्स-रे बीम का क्षेत्र।
प्रभावी फोकल स्पॉट का आकार=वास्तविक फोकल स्पॉट का आकार×sin(θ)
टारगेट को तिरछा करके, वास्तविक फोकल स्पॉट ऊष्मा को फैलाने के लिए पर्याप्त बड़ा रहता है, जबकि नीचे की ओर देखा जाने वाला प्रभावी फोकल स्पॉट छोटा दिखाई देता है, जिससे इमेज की स्पष्टता बनी रहती है।
2. एनोड हील प्रभाव (Anode Heel Effect)
चूँकि एक्स-रे फोटॉन टंगस्टन टारगेट की सतह के थोड़ा नीचे उत्पन्न होते हैं, इसलिए एनोड की ओर जाने वाले फोटॉनों को कैथोड की ओर जाने वाले फोटॉनों की तुलना में टारगेट सामग्री की मोटी परत से होकर गुजरना पड़ता है।
[ कैथोड की तरफ ] [ एनोड की तरफ ]
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│ ┌───┴───┐
│ │ टारगेट│
│ │ ढलान │
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(टारगेट में छोटा रास्ता) (टारगेट में लंबा रास्ता)
│ │
▼ ▼
[ अधिक एक्स-रे तीव्रता ] [ कम एक्स-रे तीव्रता ]
टारगेट के भीतर इस अवशोषण के कारण बीम की तीव्रता पूरे क्षेत्र में समान नहीं रहती:
- कैथोड पक्ष की ओर विकिरण की तीव्रता अधिक होती है (≈105–120%).
- एनोड पक्ष की ओर विकिरण की तीव्रता कम होती है (≈75–90%).
नैदानिक उपयोग: तकनीशियन शरीर के मोटे हिस्सों (जैसे पेट, श्रोणि/पेल्विस, या जांघ की हड्डी) को कैथोड की तरफ और पतले अंगों को एनोड की तरफ रखते हैं ताकि पूरी इमेज पर एक समान एक्सपोज़र प्राप्त हो सके।
ऊष्मा विसर्जन के तरीके (Heat Dissipation Mechanics)
हाई-पावर एक्सपोज़र के दौरान, फोकल ट्रैक का तापमान 1,500∘C से 2,000∘C से अधिक तक पहुँच सकता है। एनोड तीन तरीकों से इस ऊर्जा को बाहर निकालता है:
- तापीय विकिरण (Thermal Radiation): एक्सपोज़र के दौरान ठंडा करने का यह मुख्य तरीका है। चमकती हुई लाल एनोड डिस्क इन्फ्रारेड विकिरण (Infrared Energy) के माध्यम से वैक्यूम और तेल के स्नान में गर्मी को बाहर फेंकती है।
- तापीय चालन (Thermal Conduction): ऊष्मा धीरे-धीरे पतले मोलिब्डेनम स्टेम के माध्यम से नीचे की ओर प्रवाहित होती है।
- संवहन (Convection): काँच की ट्यूब के आसपास का तेल गर्मी को अवशोषित करता है और संवहन (Convection) द्वारा इसे बाहरी सुरक्षात्मक केसिंग तक पहुँचाता है।
एनोड का क्षरण और खराब होना (Failure Modes)
अत्यधिक गर्मी और थर्मल तनाव के कारण समय के साथ एनोड में निम्नलिखित कमियाँ आ सकती हैं:
- गड्ढे पड़ना और पिघलना (Pitting & Melting): अत्यधिक पावर पर काम करने से फोकल ट्रैक की सतह पर छोटे-छोटे गड्ढे बन जाते हैं, जो एक्स-रे बीम को बिखेर देते हैं और आउटपुट दक्षता को कम कर देते हैं।
- तापीय तनाव से दरारें (Thermal Stress Cracking): ठंडे एनोड पर बिना warm-up प्रक्रिया के सीधे उच्च-पावर एक्सपोज़र देने से एनोड डिस्क क्रैक या फ्रैक्चर हो सकती है।
- संतुलन बिगड़ना (Target Imbalance): सतह के घिसने या तापीय विकृति के कारण डिस्क का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे घूर्णन के दौरान तेज आवाज और कंपन (Vibration) होने लगता है।
