दिष्टकारी (Rectifier): यह एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक परिपथ (Circuit) है जो प्रत्यावर्ती धारा (AC – Alternating Current) को दिष्ट धारा (DC – Direct Current) में परिवर्तित करता है। AC को DC में बदलने की इस प्रक्रिया को दिष्टकरण (Rectification) कहा जाता है।
1. दिष्टकरण का मूल सिद्धांत (Working Principle)
दिष्टकरण की क्रिया मुख्य रूप से p-n जंक्शन डायोड (p-n Junction Diode) के कार्य पर आधारित होती है:
- अग्र अभिनति (Forward Bias): जब डायोड का Anode धनात्मक और Cathode ऋणात्मक होता है, तो डायोड बहुत कम प्रतिरोध के साथ धारा को बहने देता है (चालन अवस्था)।
- उत्क्रम अभिनति (Reverse Bias): जब polarity उलट जाती है, तो डायोड धारा के प्रवाह को रोक देता है और एक खुले स्विच (Open Circuit) की तरह कार्य करता है।
2. दिष्टकारी के प्रकार (Types of Rectifiers)
दिष्टकारी मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं: अर्ध-तरंग दिष्टकारी (Half-Wave Rectifier) और पूर्ण-तरंग दिष्टकारी (Full-Wave Rectifier)।
क. अर्ध-तरंग दिष्टकारी (Half-Wave Rectifier – HWR)
यह दिष्टकारी AC इनपुट तरंग के केवल एक आधे चक्र (धनात्मक या ऋणात्मक) को DC में बदलता है और दूसरे आधे चक्र को रोक देता है। इसमें केवल एक डायोड का उपयोग होता है।
- कार्यप्रणाली (Working):
- धनात्मक अर्ध-चक्र (+ Half-Cycle): डायोड अग्र अभिनति (Forward Bias) में होता है और लोड प्रतिरोधक (RL) से धारा प्रवाहित होती है।
- ऋणात्मक अर्ध-चक्र (− Half-Cycle): डायोड उत्क्रम अभिनति (Reverse Bias) में चला जाता है और कोई धारा प्रवाहित नहीं होती (आउटपुट 0 V रहता है)।
- औसत / DC वोल्टेज (Vdc): Vdc = Vmπ ≈ 0.318 Vm
- औसत / DC धारा (Idc): Idc = Imπ
- वर्ग माध्य मूल वोल्टेज (Vrms): Vrms = Vm2 = 0.5 Vm
- अधिकतम दक्षता (Efficiency – η): Max η ≈ 40.6%
- उर्मिका गुणांक (Ripple Factor – γ): γ = √[(VrmsVdc)2 − 1] ≈ 1.21
- शिखर उत्क्रम वोल्टता (PIV): PIV = Vm
- आउटपुट आवृत्ति (fout): fout = fin
ख. पूर्ण-तरंग दिष्टकारी (Full-Wave Rectifier – FWR)
यह दिष्टकारी AC इनपुट के दोनों अर्ध-चक्रों (धनात्मक और ऋणात्मक) को एक ही दिशा में DC धारा के रूप में परिवर्तित करता है। यह लगातार आउटपुट देता है।
1. केंद्र-निकासी पूर्ण-तरंग दिष्टकारी (Center-Tapped FWR)
इसमें एक Center-Tapped ट्रांसफार्मर और दो डायोड का उपयोग होता है।
- कार्यप्रणाली: धनात्मक चक्र में डायोड D1 और ऋणात्मक चक्र में डायोड D2 चालन करता है। दोनों ही स्थिति में लोड RL में धारा एक ही दिशा में बहती है।
- Peak Inverse Voltage: PIV = 2Vm
2. ब्रिज दिष्टकारी (Bridge Rectifier)
इसमें चार डायोड को ब्रिज (Bridge) के आकार में जोड़ा जाता है। इसमें महंगे सेंटर-टैप ट्रांसफार्मर की आवश्यकता नहीं होती।
- कार्यप्रणाली: धनात्मक चक्र में D1 और D3 जोड़ी में चालन करते हैं, जबकि ऋणात्मक चक्र में D2 और D4 चालन करते हैं।
- Peak Inverse Voltage: PIV = Vm
3. दिष्टकारियों की तुलनात्मक तालिका (Comparison Table)
| मानक (Parameters) | अर्ध-तरंग (Half-Wave) | सेंटर-टैप्ड (Center-Tapped) | ब्रिज (Bridge) |
|---|---|---|---|
| डायोड की संख्या | 1 | 2 | 4 |
| सेंटर-टैप ट्रांसफार्मर? | नहीं | हाँ | नहीं |
| औसत DC वोल्टेज (Vdc) | Vmπ ≈ 0.318 Vm | 2Vmπ ≈ 0.636 Vm | 2Vmπ ≈ 0.636 Vm |
| RMS वोल्टेज (Vrms) | Vm2 = 0.5 Vm | Vm√2 ≈ 0.707 Vm | Vm√2 ≈ 0.707 Vm |
| अधिकतम दक्षता (Max Efficiency) | 40.6% | 81.2% | 81.2% |
| उर्मिका गुणांक (Ripple Factor) | 1.21 | 0.482 | 0.482 |
| आउटपुट आवृत्ति (Frequency) | fin | 2fin | 2fin |
| Peak Inverse Voltage (PIV) | Vm | 2Vm | Vm |
| Transformer Utilization (TUF) | 0.287 | 0.693 | 0.812 |
4. फिल्टर परिपथ (Smoothing Filters)
दिष्टकारी से निकलने वाला आउटपुट स्पंदित DC (Pulsating DC) होता है जिसमें AC तरंगें (Ripples) मौजूद होती हैं। इन्हें हटाकर स्थिर DC प्राप्त करने के लिए फिल्टर का उपयोग किया जाता है:
- कैपेसिटर फिल्टर (C-Filter): लोड के समानांतर (Parallel) जोड़ा जाता है। यह पीक वोल्टेज पर चार्ज होता है और वोल्टेज गिरने पर लोड को करंट देता है।
- इंडक्टर फिल्टर (L-Filter): लोड के श्रेणी क्रम (Series) में लगाया जाता है। यह धारा में होने वाले अचानक बदलावों का विरोध करता है।
- LC फिल्टर (Choke-Input Filter): इंडक्टर और कैपेसिटर दोनों को मिलाकर उच्च स्तर की स्मूथिंग प्रदान करता है।
- π (पाई) फिल्टर (CLC Filter): दो कैपेसिटर और एक इंडक्टर/प्रतिरोधक का उपयोग कर बहुत कम रिपल वाली शुद्ध DC प्रदान करता है।
5. मुख्य अनुप्रयोग (Applications)
- DC पावर सप्लाई व चार्जर: मोबाइल चार्जर, लैपटॉप एडाप्टर और टीवी में AC को DC में बदलने हेतु।
- बैटरी चार्जिंग: सभी प्रकार की रिचार्जेबल बैटरियों को चार्ज करने के लिए दिष्ट धारा प्रदान करना।
- इलेक्ट्रिक वेल्डिंग: स्थिर वेल्डिंग आर्क बनाए रखने के लिए भारी DC करंट उत्पन्न करना।
- रेडियो डिमोड्यूलेशन: AM रेडियो सिग्नल से ऑडियो सिग्नल निकालने (Envelope Detector) में।
