Rectification in an X-Ray Circuit in Hindi

Rectification in an X-Ray Circuit: यह वह विद्युत प्रक्रिया (electrical process) है जो स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर से प्राप्त उच्च-वोल्टेज अल्टरनेटिंग करंट (AC) को डायरेक्ट करंट (DC) में परिवर्तित करती है। इसका मुख्य उद्देश्य X-ray ट्यूब के भीतर इलेक्ट्रॉनों का निरंतर एकदिशीय प्रवाह केवल कैथोड (फिलामेंट) से एनोड (टारगेट) की ओर बनाए रखना है।

1. X-Ray सर्किट में रेक्टिफायर की आवश्यकता (Functional Necessity)

Step-Up Transformer (High Voltage AC) Rectifier Circuit (AC to High-kV DC) X-Ray Tube Cathode (-) ──► Anode (+)
Block Diagram: High Voltage Section of Diagnostic X-Ray Unit
  • रिवर्स बमबार्डमेंट से सुरक्षा (Preventing Reverse Bombardment): यदि ट्यूब पर सीधे AC लगाया जाए, तो ऋणात्मक चक्र (negative cycle) में एनोड ऋणात्मक और कैथोड धनात्मक हो जाएगा। गर्म एनोड से थर्मियोनिक उत्सर्जन द्वारा इलेक्ट्रॉन निकलकर फिलामेंट पर टकराएंगे, जिससे फिलामेंट तुरंत पिघलकर नष्ट हो जाएगा।
  • अधिकतम फोटॉन उत्पादन (Maximum Radiation Yield): विकिरण उत्पादन तभी प्रभावी होता है जब वोल्टेज पीक मान (kVp) पर या उसके निकट हो। रेक्टिफिकेशन निरंतर आगे की दिशा में गतिज ऊर्जा सुनिश्चित करता है।
  • सर्किट में स्थिति (Location): यह स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर के सेकेंडरी (High-Tension) साइड और X-ray ट्यूब के बीच हाई-वोल्टेज ऑयल टैंक के अंदर स्थित होता है।

2. सॉलिड-स्टेट सेमीकंडक्टर डायोड्स (Solid-State Rectifiers)

आधुनिक X-ray मशीनों में पुराने वाल्व ट्यूब्स (Valve Tubes) की जगह सिलिकॉन सेमीकंडक्टर डायोड्स का उपयोग किया जाता है।

  • सीरीज स्टैकिंग (Series Stacking): एक सिलिकॉन डायोड लगभग 1000 V (1 kV) का Peak Inverse Voltage (PIV) झेल सकता है। चूंकि X-ray मशीनें 40 kVp से 150 kVp पर कार्य करती हैं, इसलिए दर्जनों से लेकर सैकड़ों सिलिकॉन डायोड्स को सीरीज (श्रेणी क्रम) में जोड़कर इंसुलेटिंग ऑयल में डुबोया जाता है।

3. X-Ray सर्किट में रेक्टिफायर के प्रकार (Types & Circuit Diagrams)

क. सिंगल-फेज फुल-वेव ब्रिज रेक्टिफायर (Full-Wave 4-Diode Bridge)

इसमें 4 सॉलिड-स्टेट डायोड्स का एक ब्रिज बनाया जाता है। यह AC इनपुट के दोनों अर्ध-चक्रों (Positive और Negative) को एक ही दिशा में मोड़कर प्रति सेकंड 100/120 पल्स उत्पन्न करता है।

High-kV Secondary A B D1 D2 D3 D4 X-Ray Tube Cathode (-) e⁻ Beam Anode (+) Primary X-Ray Beam
Circuit Diagram: 4-Diode Bridge Rectifier Connected to X-Ray Tube

ख. थ्री-फेज रेक्टिफिकेशन (Three-Phase Circuits)

थ्री-फेज बिजली में 120° के अंतर पर तीन स्वतंत्र वोल्टेज तरंगें होती हैं, जिससे वोल्टेज कभी भी शून्य (zero) तक नहीं गिरता:

  • 3-Phase, 6-Pulse (6 Diodes): प्रति चक्र 6 वोल्टेज स्पंद (360 pulses/sec) मिलते हैं। इसका Voltage Ripple लगभग 13% से 14% होता है।
  • 3-Phase, 12-Pulse (12 Diodes): दो सेकेंडरी वाइंडिंग्स (Star व Delta) और 12 डायोड्स का उपयोग कर 720 pulses/sec मिलते हैं। इसका Voltage Ripple मात्र 3.5% से 4% होता है।

ग. आधुनिक हाई-फ़्रीक्वेंसी जनरेटर (High-Frequency Inverter Generators)

यह आज के सभी आधुनिक डायग्नोस्टिक X-ray व CT स्कैनर्स का मानक है।

  • सिद्धांत: मुख्य 50/60 Hz सप्लाई को पहले DC में बदला जाता है, फिर हाई-स्पीड ट्रांजिस्टर (IGBTs) द्वारा इसे 5 kHz से 100 kHz की उच्च-आवृत्ति AC में इनवर्ट किया जाता है। इसके बाद छोटे आकार के ट्रांसफार्मर से स्टेप-अप करके स्थिर DC में रेक्टिफाई किया जाता है।
  • Voltage Ripple: < 1% (लगभग एक समान फ्लैट लाइन)

4. वोल्टेज रिपल और वेवफॉर्म तुलना (Voltage Ripple & Waveforms)

वोल्टेज रिपल (Voltage Ripple) का सूत्र:
Voltage Ripple (%) = Vmax − Vmin Vmax × 100
1-Phase Full-Wave (100% Ripple) 0 to kVp 3-Phase, 6-Pulse (~14% Ripple) 14% Drop 3-Phase, 12-Pulse (~4% Ripple) 4% Ripple High-Frequency Inverter (<1% Ripple) Near Constant DC
Comparison: Voltage Ripple Across Different X-Ray Generator Types

5. जनरेटर प्रकारों की तुलनात्मक तालिका (Summary Table)

जनरेटर प्रकार (Type)डायोड्स की संख्याPulses/Sec (60 Hz)Voltage Rippleविकिरण गुणवत्ता (Beam Quality)
Self-Rectified0 (Tube acts as diode)60100%न्यूनतम (High Skin Dose)
Half-Wave1 या 260100%कम
Single-Phase Full-Wave4120100%मध्यम
3-Phase, 6-Pulse636013.5%उत्कृष्ट
3-Phase, 12-Pulse127203.5%बहुत उच्च
High-Frequency (HF)Inverter + HF BridgeConstant DC< 1%सर्वोत्तम (Best Diagnostic Quality)

6. रेडियोग्राफी में कम रिपल के लाभ (Clinical Significance)

  • मरीज की स्किन डोज में कमी (Reduced Patient Dose): उच्च रिपल वाले जनरेटर में जब वोल्टेज कम होता है, तो कम ऊर्जा वाले “सॉफ्ट एक्स-रे फोटॉन” निकलते हैं जो मरीज के शरीर को पार नहीं कर पाते और केवल त्वचा द्वारा सोख लिए जाते हैं। कम रिपल होने से सॉफ्ट फोटॉन्स नहीं बनते, जिससे व्यर्थ रेडिएशन डोज़ घटती है।
  • कम एक्सपोजर समय (Shorter Exposure Time): उच्च औसत ऊर्जा के कारण कम समय (1 ms तक) में पर्याप्त फोटॉन निकल जाते हैं। इससे मरीज के हिलने (Motion Blur) से इमेज खराब नहीं होती।
  • ट्यूब की लंबी उम्र (Extended Tube Life): समान इमेज रिसेप्टर एक्सपोज़र पाने के लिए कम हीट यूनिट्स (HU) उत्पन्न होती हैं, जिससे एनोड टारगेट सुरक्षित रहता है।

By abhi

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